भावांतर योजना: MSP से कम दाम पर किसानों को कैसे मिले ₹1492 करोड़? पूरी सच्चाई जानिए

मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण योजना चला रखी है जिसका नाम है मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना. इस योजना के तहत अगर किसानों को मंडी में अपनी फसल बेचते समय न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP से कम कीमत मिलती है, तो राज्य सरकार उस कमी की भरपाई करती है. यह रकम सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए किसानों के बैंक खाते में भेजी जाती है. आइए जानते हैं इस योजना के बारे में पूरी जानकारी.

कब और क्यों शुरू हुई यह योजना?

मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना की शुरुआत 2019 में की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को बाजार में उतार-चढ़ाव से बचाना और उन्हें उनकी मेहनत का सही दाम दिलाना था. शुरुआत में यह योजना सिर्फ कुछ चुनिंदा फसलों के लिए थी, लेकिन बाद में इसका दायरा बढ़ाया गया. पिछले साल मध्य प्रदेश सरकार ने सोयाबीन उत्पादकों को भी इस योजना में शामिल कर लिया, जो प्रदेश के लाखों किसानों के लिए राहत की बात है.

कैसे काम करती है भावांतर योजना?

इस योजना का तरीका बेहद सरल है. सरकार समय-समय पर फसल का मॉडल रेट तय करती है. यह मॉडल रेट MSP के आधार पर निर्धारित किया जाता है. जब किसान मंडी में अपनी फसल बेचता है और उसे मॉडल रेट से कम कीमत मिलती है, तो दोनों के बीच का अंतर सरकार द्वारा चुकाया जाता है.

उदाहरण के लिए मान लीजिए सोयाबीन का मॉडल रेट 4458 रुपये प्रति क्विंटल है. अगर किसान को मंडी में 4200 रुपये प्रति क्विंटल ही मिलते हैं, तो बाकी के 258 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान सरकार DBT के माध्यम से सीधे किसान के खाते में कर देगी.

किन फसलों पर मिलता है लाभ?

भावांतर योजना शुरुआत में मुख्य रूप से प्याज, टमाटर, आलू जैसी सब्जियों के लिए थी. लेकिन अब इसमें सोयाबीन को भी जोड़ा जा चुका है. सोयाबीन मध्य प्रदेश की प्रमुख खरीफ फसल है और लाखों किसान इसकी खेती करते हैं. सरकार समय-समय पर अन्य फसलों को भी इस योजना में जोड़ने पर विचार करती रहती है.

अब तक कितने किसानों को मिला फायदा?

मध्य प्रदेश सरकार ने इस योजना के तहत अब तक करोड़ों रुपये किसानों के खाते में ट्रांसफर किए हैं. हाल ही में सोयाबीन भावांतर योजना की चौथी किस्त जारी की गई जिसमें 1.17 लाख किसानों के खाते में 200 करोड़ रुपये भेजे गए. अब तक कुल मिलाकर 7 लाख 10 हजार से ज्यादा किसानों को इस योजना का लाभ मिल चुका है और उनके खाते में 1492 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की जा चुकी है.

कौन से किसान उठा सकते हैं लाभ?

इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान को मध्य प्रदेश का मूल निवासी होना जरूरी है. जिन किसानों ने योजना की अवधि के दौरान अपनी फसल मंडी में बेची है, वे इसके पात्र होते हैं. किसान का बैंक खाता आधार कार्ड से लिंक होना चाहिए क्योंकि भुगतान DBT के माध्यम से किया जाता है. मंडी में फसल बेचने की रसीद और अन्य जरूरी दस्तावेज भी होने चाहिए.

मॉडल रेट कैसे तय होता है?

सरकार नियमित रूप से बाजार भाव, MSP और अन्य कारकों को देखते हुए मॉडल रेट जारी करती है. सोयाबीन के मामले में पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को 4020 रुपये प्रति क्विंटल था. इसके बाद बाजार की स्थिति के अनुसार इसमें बदलाव किए गए. 5 जनवरी को सोयाबीन का मॉडल रेट 4458 रुपये प्रति क्विंटल था. यह रेट समय-समय पर अपडेट होता रहता है.

पैसा कब और कैसे मिलता है?

भावांतर योजना के तहत पैसा किस्तों में दिया जाता है. जब किसान मंडी में फसल बेचते हैं तो उसका पूरा रिकॉर्ड सरकारी सिस्टम में दर्ज हो जाता है. इसके बाद विभाग द्वारा गणना की जाती है कि किस किसान को कितनी भरपाई मिलनी चाहिए. फिर यह राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है. आमतौर पर यह प्रक्रिया 15-30 दिनों में पूरी हो जाती है.

क्यों जरूरी है यह योजना?

कई बार ऐसा होता है कि फसल की अच्छी पैदावार होने पर बाजार में भाव गिर जाते हैं. किसानों को अपनी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिल पाता. इससे किसान आर्थिक तंगी में फंस जाते हैं. भावांतर योजना इसी समस्या का समाधान है. इससे किसानों को यह भरोसा मिलता है कि बाजार भाव चाहे जो भी हो, उन्हें कम से कम MSP जितना तो मिलेगा ही.

यह योजना किसानों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करती है और उन्हें बेहतर खेती के लिए प्रोत्साहित करती है.

अन्य राज्यों में भी शुरू हो सकती है योजना

मध्य प्रदेश की भावांतर योजना की सफलता को देखते हुए अन्य राज्य भी इसे अपनाने पर विचार कर रहे हैं. यह किसान हितैषी योजना का एक बेहतरीन उदाहरण है जो सीधे किसानों की जेब में पैसा पहुंचाती है.

निष्कर्ष

मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना मध्य प्रदेश के किसानों के लिए एक वरदान साबित हुई है. यह योजना सुनिश्चित करती है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिले. अगर आप भी मध्य प्रदेश के किसान हैं तो इस योजना की जानकारी रखें और जरूरत पड़ने पर इसका लाभ जरूर उठाएं.

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