प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: उत्तर प्रदेश के उन किसानों के लिए राहत भरी खबर है जिनकी फसलें हाल ही में बेमौसम बारिश, आंधी और प्रतिकूल मौसम की वजह से बर्बाद हो गई हैं। राज्य के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बीमा कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि 31 मार्च तक प्रभावित जिलों में सर्वे का काम हर हाल में पूरा किया जाए। इसके बाद अप्रैल के पहले सप्ताह से मुआवजा वितरण की प्रक्रिया तेज की जाएगी।
कृषि मंत्री ने दिए सख्त निर्देश
लखनऊ स्थित विधान भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने साफ शब्दों में कहा कि सर्वे में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो बीमा कंपनियां तय समय सीमा में काम पूरा नहीं करेंगी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने मुख्य सचिव और कृषि उत्पादन आयुक्त को यह भी निर्देशित किया कि जिलाधिकारियों के माध्यम से सर्वे कार्य की लगातार निगरानी सुनिश्चित की जाए। किसानों को राहत मिलाने के लिए इस पूरे प्रक्रिया में पारदर्शिता रहने वाली है।
April के महीने के सप्ताह के पहले इसकी समीक्षा होगी
कृषि मंत्री ने बताया कि 31 मार्च तक सर्वे पूरा होने के बाद अप्रैल के पहले सप्ताह में सर्वे रिपोर्ट की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर वास्तविक नुकसान का आकलन होगा और किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। सरकार की इस सख्ती से यह साफ संकेत मिल रहा है कि इस बार राहत देने में कोई देरी नहीं होगी।
अब तक कितने किसानों को मिला फायदा?
उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के आंकड़े बताते हैं कि यह योजना कितनी बड़े पैमाने पर काम कर रही है।
वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक प्रदेश के 67.52 लाख किसानों को कुल 5660.33 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति दी जा चुकी है। खरीफ 2025 सीजन में 20.68 लाख किसानों का बीमा किया गया जिसमें से 5.39 लाख किसानों को 532.17 करोड़ रुपये का मुआवजा मिला। रबी 2025-26 सीजन में अब तक 18.78 लाख किसानों का बीमा हो चुका है और किसानों ने प्रीमियम के रूप में 136.67 करोड़ रुपये जमा किए हैं।
इन फसलों को मिली है बीमा योजना में जगह
रबी सीजन के तहत गेहूं, जौ, चना, मटर, मसूर, सरसों, अलसी और आलू जैसी प्रमुख फसलों को इस योजना में शामिल किया गया है। मौसम के आधारित बागवानी फसलों के इस फसल बिमा योजना के तहत कवर किया जायेगा। खरीफ 2025 में केला, पान और मिर्च की फसलें शामिल रहीं। वहीं रबी 2025-26 में मटर, टमाटर, शिमला मिर्च और आम की फसलों का बीमा किया गया है।
बागवानी किसान ले रहे है इस योजना का फायदा
मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत अब तक 0.35 लाख किसानों को 29.01 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति दी जा चुकी है। यह आंकड़ा बताता है कि सरकार केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं है बल्कि बागवानी किसानों को भी बराबर सुरक्षा देने की कोशिश कर रही है।
क्लेम प्रक्रिया होगी पूरी तरह पारदर्शी
कृषि मंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि बीमा क्लेम प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। किसानों को योजना का लाभ लेने में किसी भी तरह की तकनीकी समस्या का सामना न करना पड़े इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। बैठक में कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख और कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
किसानों के लिए क्या है संदेश?
अगर आपकी फसल को इस बार मौसम की मार से नुकसान हुआ है तो घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार ने सर्वे से लेकर मुआवजे तक की पूरी प्रक्रिया को एक तय समय सीमा में बांध दिया है। अपने नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय से संपर्क करें और अपनी फसल के नुकसान की जानकारी जरूर दर्ज कराएं ताकि आप भी इस योजना का पूरा लाभ उठा सकें।

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