अब बिना बायोमेट्रिक नहीं मिलेगा किसान लोन! सहकारी समितियों के नियम बदले

अब सहकारी समितियों से ऋण लेने के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन जरूरी, लोन अप्रूवल की जानकारी मिलेगी एसएमएस से

देश में सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को दिए जाने वाले कृषि ऋण की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। केंद्र और राज्य सरकारों ने किसान ऋण वितरण को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। अब किसानों को ग्राम सेवा सहकारी समितियों से ऋण राशि लेने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही लोन अप्रूवल और खाते में राशि क्रेडिट होने की सूचना सीधे किसान के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एसएमएस के जरिए भेजी जाएगी।

विभिन्न राज्यों की सहकारिता मंत्रालयों ने हाल ही में विधानसभा सत्रों में जानकारी देते हुए बताया कि इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य सहकारी कृषि ऋण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है। पहले जहां फर्जी लोन डिस्बर्समेंट और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती थीं, वहीं अब आधार बेस्ड बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और ऑनलाइन सिस्टम के जरिए ऐसी संभावनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई गई है।

सहकारी समिति से किसान ऋण कैसे मिलेगा?

पहला कदम: समिति की सदस्यता लें

सहकारी समिति से कृषि ऋण प्राप्त करने के लिए किसानों को सबसे पहले अपने क्षेत्र की ग्राम सेवा सहकारी समिति या प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति (PACS) की सदस्यता लेनी होगी। नई गाइडलाइंस के अनुसार, सदस्यता रजिस्ट्रेशन के दौरान आधार कार्ड का वेरिफिकेशन अनिवार्य है।

दूसरा कदम: आवश्यक दस्तावेज जमा करें

सदस्यता मिलने के बाद किसान को निम्नलिखित डॉक्यूमेंट्स समिति कार्यालय में जमा कराने होंगे:

  • आधार कार्ड (बैंक अकाउंट से लिंक)
  • बैंक खाता पासबुक या कैंसल चेक
  • भूमि स्वामित्व के कागजात (खसरा-खतौनी, जमाबंदी)
  • किसान क्रेडिट कार्ड (यदि है)
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • मोबाइल नंबर (आधार से लिंक)

तीसरा कदम: ऑनलाइन आवेदन करें

नए नियमों के तहत, कृषि ऋण के लिए आवेदन अब ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जाता है। किसान या तो स्वयं या समिति के सहायक की मदद से ऑनलाइन एप्लीकेशन फॉर्म भर सकते हैं। फॉर्म में व्यक्तिगत विवरण, भूमि का ब्यौरा, ऋण की राशि और उद्देश्य जैसी जानकारी दर्ज करनी होती है।

चौथा कदम: बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब पूरी प्रक्रिया आधार आधारित बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से पूरी होती है। लोन अप्रूवल और डिस्बर्समेंट के समय किसान की उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट) या आईरिस स्कैन के जरिए पहचान सत्यापित की जाती है। बिना बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के अब कोई भी लोन राशि जारी नहीं की जाएगी।

इस डिजिटल और बायोमेट्रिक व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाता है कि ऋण वास्तविक लाभार्थी किसान तक ही पहुंचे और किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किसान के नाम पर फर्जी लोन लेने की संभावना लगभग समाप्त हो जाए।

पांचवा कदम: एसएमएस से मिलेगी जानकारी

लोन अप्रूव होने पर किसान के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर तुरंत एसएमएस भेजा जाएगा। जब ऋण राशि किसान के बैंक खाते में क्रेडिट होगी, तब भी एक कन्फर्मेशन एसएमएस आएगा। इससे किसान को हर स्टेप की रियल-टाइम जानकारी मिलती रहेगी।

नए नियमों के पीछे क्या कारण हैं?

फर्जी ऋण वितरण के मामले सामने आए

पिछले कुछ वर्षों में देश के कई राज्यों में सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों के नाम पर फर्जी लोन डिस्बर्समेंट के मामले प्रकाश में आए थे। कुछ राज्यों में केंद्रीय सहकारी बैंकों की शाखाओं से संबंधित ग्राम सेवा सहकारी समितियों में किसानों के नाम पर अनधिकृत ऋण वितरण की शिकायतें मिली थीं।

जांच के बाद कई समितियों के व्यवस्थापकों, शाखा प्रबंधकों और अधिकारियों को अनियमित ऋण वितरण का दोषी पाया गया। इन मामलों में एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। कुछ समितियों में फर्जी डिस्बर्समेंट और गबन के आरोप में पुलिस प्रकरण भी दर्ज हुए हैं।

पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना

सरकार का मानना है कि बायोमेट्रिक सत्यापन, ऑनलाइन एप्लीकेशन सिस्टम और एसएमएस नोटिफिकेशन जैसी व्यवस्थाओं से सहकारी ऋण वितरण प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बन गई है। इससे न केवल फ्रॉड पर अंकुश लगेगा, बल्कि किसानों का भरोसा भी मजबूत होगा।

किन राज्यों में लागू हुए नए नियम?

राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे प्रमुख कृषि प्रधान राज्यों ने पहले ही बायोमेट्रिक बेस्ड लोन डिस्बर्समेंट सिस्टम लागू कर दिया है। अन्य राज्य भी धीरे-धीरे इस डिजिटल सिस्टम को अपना रहे हैं।

विशेष रूप से राजस्थान में सहकारिता विभाग ने फरवरी 2026 में स्पष्ट किया कि प्रदेश के सभी जिलों में यह नई व्यवस्था पूरी तरह लागू हो चुकी है।

डिजिटल किसान आईडी और एग्रीस्टैक का रोल

किसान पहचान पत्र या किसान कार्ड

केंद्र सरकार की एग्रीस्टैक पहल के तहत अब प्रत्येक किसान को एक यूनीक डिजिटल किसान आईडी या किसान पहचान पत्र जारी किया जा रहा है। यह 10 अंकों का नंबर किसान के आधार नंबर, भूमि रिकॉर्ड, बैंक अकाउंट और अन्य डिटेल्स से लिंक होता है।

महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने 15 अप्रैल 2025 से राज्य की सब्सिडी योजनाओं का लाभ लेने के लिए डिजिटल किसान आईडी अनिवार्य कर दिया है। देश भर में मार्च 2025 तक 2 करोड़ से अधिक बायोमेट्रिक किसान आईडी जारी की जा चुकी हैं।

लोन प्रोसेसिंग में तेजी

डिजिटल किसान आईडी से लोन प्रोसेसिंग तेज हो गई है क्योंकि किसान की सभी जानकारी एक ही जगह सेंट्रलाइज्ड है। समिति को बार-बार डॉक्यूमेंट्स वेरिफाई करने की जरूरत नहीं पड़ती।

मेगा लोन वितरण कार्यक्रम की तैयारी

कई राज्यों में फरवरी-मार्च 2026 में मेगा लोन डिस्बर्समेंट प्रोग्राम आयोजित किए जा रहे हैं। उदाहरण के लिए, कुछ राज्यों में 20 फरवरी और 16 मार्च 2026 को दो बड़े ऋण वितरण कार्यक्रम होने वाले हैं, जिनमें 2.20 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

इन कार्यक्रमों में भी बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और एसएमएस अलर्ट सिस्टम का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) में भी बदलाव

e-KCC का विस्तार

किसान क्रेडिट कार्ड योजना को भी डिजिटल बनाने के प्रयास तेज हुए हैं। e-KCC यानी इलेक्ट्रॉनिक किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए किसान बिना फिजिकल कार्ड के भी लोन एक्सेस कर सकते हैं। यह सिस्टम भी आधार बेस्ड ऑथेंटिकेशन पर आधारित है।

महिला किसानों के लिए विशेष फोकस

यूनियन बजट 2026 में महिला किसानों के लिए क्रेडिट एक्सेस बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। PLFS डेटा के अनुसार, ग्रामीण कामकाजी महिलाओं में 77% कृषि क्षेत्र में संलग्न हैं, लेकिन उन्हें औपचारिक लोन की पहुंच काफी कम है। नई व्यवस्था में महिला किसानों को सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आसान लोन उपलब्ध कराने की योजना है।

नए नियमों से किसानों को क्या फायदा होगा?

पारदर्शिता और सुरक्षा

बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से यह सुनिश्चित होता है कि लोन राशि केवल असली किसान तक ही पहुंचे। किसी और के द्वारा फर्जी तरीके से लोन लेने की संभावना खत्म हो जाती है।

रियल-टाइम अपडेट्स

एसएमएस नोटिफिकेशन से किसान को हर स्टेप की जानकारी तुरंत मिल जाती है। इससे पारदर्शिता बढ़ती है और किसी भी गड़बड़ी का पता तुरंत चल जाता है।

तेज प्रोसेसिंग

डिजिटल सिस्टम होने से लोन अप्रूवल और डिस्बर्समेंट की प्रक्रिया पहले की तुलना में तेज हो गई है। किसान को बार-बार बैंक या समिति के चक्कर नहीं काटने पड़ते।

फ्रॉड पर रोक

सबसे बड़ा फायदा यह है कि फर्जी लोन वितरण और गबन की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लग जाती है, जिससे सरकारी फंड का सही उपयोग होता है।

डिजिटल सिस्टम और कड़ी निगरानी का असर

नई व्यवस्था के तहत अब ऋण प्रक्रिया पूरी तरह टेक्नोलॉजी बेस्ड हो गई है, जिससे पारदर्शिता के साथ-साथ जवाबदेही भी सुनिश्चित हो रही है। सरकार का मानना है कि डिजिटल सिस्टम और कड़ी मॉनिटरिंग से भविष्य में सहकारी ऋण से जुड़े विवादों और अनियमितताओं में काफी कमी आएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: सहकारी समिति से ऋण लेने के नियमों में क्या मुख्य बदलाव हुआ है?

उत्तर: अब किसानों को ग्राम सेवा सहकारी समिति से ऋण लेने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। बिना बायोमेट्रिक सत्यापन के कोई भी लोन राशि जारी नहीं होगी।

प्रश्न 2: ऋण स्वीकृति की जानकारी किसान को कैसे मिलेगी?

उत्तर: ऋण अप्रूव होने और राशि बैंक खाते में जमा होने की सूचना किसान को एसएमएस के माध्यम से उसके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजी जाएगी।

प्रश्न 3: बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण क्यों अनिवार्य किया गया है?

उत्तर: फर्जी ऋण वितरण और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य किया गया है, ताकि ऋण केवल वास्तविक किसान को ही मिले और किसी अन्य के द्वारा दुरुपयोग न हो सके।

प्रश्न 4: डिजिटल किसान आईडी क्या है और यह क्यों जरूरी है?

उत्तर: डिजिटल किसान आईडी या किसान पहचान पत्र एक 10 अंकों का यूनीक नंबर है जो किसान के आधार, भूमि रिकॉर्ड और बैंक अकाउंट से लिंक होता है। यह एग्रीस्टैक पहल का हिस्सा है और लोन प्रोसेसिंग को तेज और पारदर्शी बनाता है।

प्रश्न 5: नई व्यवस्था से किसानों को मुख्य लाभ क्या होगा?

उत्तर: नई डिजिटल और बायोमेट्रिक प्रणाली से ऋण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तेज होगी। इससे फर्जीवाड़े पर पूरी तरह अंकुश लगेगा, रियल-टाइम अपडेट्स मिलेंगे और किसानों का भरोसा मजबूत होगा।

नई किसान ऋण व्यवस्था 2026 भारत के कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, एसएमएस अलर्ट और ऑनलाइन प्रोसेसिंग के जरिए अब किसानों को सुरक्षित और तेज लोन मिल सकेगा, जबकि फर्जी वितरण पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। यदि आप पात्र किसान हैं तो जल्द से जल्द अपनी नजदीकी सहकारी समिति में संपर्क करें और नई डिजिटल व्यवस्था का लाभ उठाएं!

Leave a Comment