खेती में नए विकल्प तलाशने वाले किसानों के लिए एक शानदार मौका आया है. अगर आप कम मेहनत, कम पानी और लंबे समय तक मुनाफा देने वाली फसल की तलाश में हैं, तो बांस की खेती आपके लिए सही विकल्प हो सकती है. सबसे अच्छी बात यह है कि केंद्र और राज्य सरकारें राष्ट्रीय बांस मिशन के अंतर्गत किसानों को भारी सब्सिडी दे रही हैं. आइए समझते हैं कि यह योजना क्या है और आप इसका फायदा कैसे उठा सकते हैं.
बांस का बिजनेस क्यों बन रहा है, सुनहरा अवसर?
पिछले कुछ सालों में बांस की मांग में जबरदस्त उछाल आया है. अब बांस सिर्फ घर की बाड़ या छप्पर बनाने तक सीमित नहीं रहा. आधुनिक उद्योगों में बांस का व्यापक उपयोग हो रहा है – पेपर मिल्स में कागज बनाने के लिए, टेक्सटाइल इंडस्ट्री में कपड़ा और रेयॉन फाइबर बनाने के लिए, फर्नीचर और होम डेकोर आइटम्स में, ईको-फ्रेंडली उत्पादों जैसे टूथब्रश, कटलरी और स्ट्रॉ बनाने में.
वैश्विक स्तर पर देखें तो 2018 में बांस उत्पादों का एक्सपोर्ट लगभग तीन अरब डॉलर का था. भारत में भी तस्वीर बदल रही है. पांच साल पहले हम जहां 720 करोड़ रुपये का बांस एक्सपोर्ट करते थे, वहीं अब यह आंकड़ा 1,163 करोड़ रुपये को पार कर गया है. दिलचस्प बात यह है कि बांस का आयात घट रहा है, मतलब घरेलू उत्पादन बढ़ रहा है और मांग भी.
पर्यावरण के लिए भी वरदान
बांस पर्यावरण के संरक्षण के मामले में बेहद महत्वपूर्ण साबित होता है. यह सामान्य पेड़ों की तुलना में 35% ज्यादा ऑक्सीजन छोड़ता है और कार्बन डाइऑक्साइड को तेजी से सोखता है. मिट्टी के कटाव को रोकने, जल संरक्षण और वायु शुद्धि में बांस का योगदान अतुलनीय है. यही कारण है कि सरकार इसे बढ़ावा दे रही है.
सब्सिडी योजना की पूरी जानकारी
राष्ट्रीय बांस मिशन योजना में दो तरह से सहायता दी जाती है.
पहला विकल्प – अगर आपके पास खाली जमीन है और आप पूरी जमीन पर घने तरीके से बांस लगाना चाहते हैं, तो प्रति हेक्टेयर कुल खर्च 1.2 लाख रुपये आता है. इसमें सरकार आधा यानी 60,000 रुपये देती है. यह पैसा एक साथ नहीं, बल्कि दो किस्तों में मिलता है. पहली किस्त में 36,000 रुपये और दूसरी में 24,000 रुपये.
दूसरा विकल्प – अगर आप खेत की मेड़ पर बांस लगाना चाहते हैं तो प्रति पौधे की लागत 300 रुपये मानी गई है. इस पर 150 रुपये प्रति पौधा सब्सिडी मिलेगी. कम से कम 10 पौधे लगाने पर यह सुविधा मिलती है.
कितनी जमीन चाहिए?
योजना के नियमों के अनुसार, आप न्यूनतम 400 वर्ग मीटर (लगभग 4 डिसमिल) से लेकर अधिकतम 2,000 वर्ग मीटर (लगभग 20 डिसमिल) तक जमीन पर बांस लगा सकते हैं. छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह बहुत उपयुक्त है क्योंकि थोड़ी सी जमीन में भी शुरुआत हो सकती है.
दिलचस्प बात यह है कि एक परिवार में पति-पत्नी दोनों अलग-अलग आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते उनके नाम अलग-अलग जमीन का मालिकाना हक हो.
योजना का लाभ किन राज्यों के किसानों को मिल रहा है?
यह योजना पूरे देश में चल रही है, लेकिन कुछ राज्यों में इसे विशेष प्राथमिकता दी गई है. बिहार में 27 जिलों में यह योजना सक्रिय है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भी यह योजना जोरों पर है.
आवेदन के लिए जरूरी कागजात
योजना में आवेदन करने के लिए आपको ये दस्तावेज तैयार रखने होंगे – जमीन के कागजात जो साबित करें कि आप जमीन के मालिक हैं, पिछले दो वर्षों की भू-राजस्व रसीद, आधार कार्ड, बैंक खाते की पासबुक जिसमें IFSC कोड साफ दिखे, और एक सक्रिय मोबाइल नंबर.
आवेदन कैसे करें?
आवेदन पूरी तरह से ऑनलाइन है. हर राज्य के कृषि या उद्यान विभाग की अपनी वेबसाइट है जहां से आप आवेदन कर सकते हैं. बिहार के किसान उद्यान विभाग की साइट पर जा सकते हैं. वहां राष्ट्रीय बांस मिशन का सेक्शन मिलेगा.
फॉर्म भरते समय सभी जानकारी सही-सही भरें और मांगे गए दस्तावेजों को स्कैन करके अपलोड करें. आवेदन जमा होने के बाद विभाग के अधिकारी जमीन का निरीक्षण करेंगे. जांच में सब कुछ ठीक मिलने के बाद आपके आवेदन को मंजूरी मिल जाएगी.
पौधे कहां से मिलेंगे?
सरकार ने इसकी भी व्यवस्था की है. आपको बाजार से पौधे खरीदने की जरूरत नहीं है. विभाग द्वारा अधिकृत नर्सरियों से जलवायु के अनुसार उपयुक्त किस्म के पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे. अलग-अलग इलाकों के लिए अलग-अलग किस्में तय की गई हैं ताकि अच्छा उत्पादन हो.
बांस से कितनी कमाई हो सकती है?
बांस की खास बात यह है कि एक बार लगाने के बाद 40-50 साल तक पैदावार देता है. तीसरे-चौथे साल से कटाई शुरू हो जाती है. अच्छी देखभाल करने पर एक हेक्टेयर से सालाना 1.5 से 2 लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है. पारंपरिक फसलों की तुलना में पानी, खाद और मेहनत कम लगती हैं.
अंतिम सलाह
अगर आपके पास थोड़ी भी खाली जमीन है या खेत की मेड़ खाली पड़ी है, तो बांस की खेती एक स्मार्ट निर्णय हो सकता है. सरकार द्वारा दी जाने वाली आधी सब्सिडी से शुरुआती लागत आधी रह जाती है. लंबे समय तक नियमित आय का यह अच्छा जरिया बन सकता है. जल्दी आवेदन करें क्योंकि पहले आओ पहले पाओ के आधार पर लाभ मिलता है.