उत्तर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन क्षेत्र को सशक्त करने के लिए योगी प्रशासन द्वारा संचालित ‘नन्दिनी कृषक समृद्धि कार्यक्रम’ अब गति पकड़ता दिख रहा है। कृषकों की वार्षिक आमदनी में इजाफा करने और गांवों की आर्थिक स्थिति सुधारने के मकसद से प्रारंभ यह कार्यक्रम अब धरातल पर सकारात्मक नतीजे देने लगा है। प्रशासन ने आगामी तीन बरसों में 204 दुग्धशाला इकाइयां लगाने का संकल्प लिया है। इस दिशा में बैंकों से कर्ज की स्वीकृति और आर्थिक सहायता वितरण की गतिविधियों को तीव्रता प्रदान की गई है।
सब्सिडी राशि वितरण में आई रफ्तार
पशुधन विकास विभाग के अनुसार, रुके हुए प्रकरणों का शीघ्र निपटारा करने और हितग्राहियों तक निर्धारित समय में धनराशि पहुंचाने के लिए संबंधित अधिकारियों को विशेष आदेश जारी किए गए हैं। इस कदम से दुग्धालय स्थापना की रफ्तार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और कृषक समुदाय का भरोसा भी पुख्ता हुआ है।
अनेक जनपदों में बैंकिंग संस्थाओं द्वारा ऋण की मंजूरी प्रदान कर दी गई है और योग्य लाभार्थियों को प्रथम चरण की आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया में तेजी लाई गई है।
वर्ष 2025-26 में व्यापक स्तर पर फैलाव
इस कार्यक्रम को और विस्तृत बनाते हुए आर्थिक वर्ष 2025-26 में 57 जिलों में 114 नवीन दुग्धशाला केंद्रों की स्थापना का उद्देश्य तय किया गया है। यह इस परियोजना का अब तक का सर्वाधिक बड़ा विस्तार होगा।
प्रशासन का ध्येय है कि अधिकाधिक पशुपालकों को इस पहल से जोड़ा जाए, जिससे प्रदेश में दूध उत्पादन में महत्वपूर्ण इजाफा संभव हो सके।
वर्ष 2023-24 की उपलब्धियां
आर्थिक वर्ष 2023-24 में 10 मंडल केंद्र जिलों में 50 डेयरी इकाइयों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इनमें से अधिकांश प्रकरणों में बैंकिंग कर्ज स्वीकृत हो चुका है, जबकि शेष प्रस्ताव अंतिम दौर में हैं।
प्रगति विवरण:
अधिकतर स्थानों पर प्रथम चरण की राशि वितरित अनेक क्षेत्रों में द्वितीय चरण की कार्यवाही सक्रिय इकाई स्थापना में ठोस प्रगति
यह दर्शाता है कि योजना का कार्यान्वयन योजनाबद्ध ढंग से संपन्न हो रहा है।
2024-25 का लक्ष्य और प्रगति
चालू वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 8 मंडलीय मुख्यालयों में 40 दुग्धशाला इकाइयों का संकल्प निश्चित किया गया है। विभिन्न जिलों में ऋण स्वीकृति की गतिविधियां द्रुत गति से आगे बढ़ रही हैं।
हितग्राहियों को आरंभिक किस्त की आर्थिक मदद जारी करने की व्यवस्था तैयार है। इससे नवीन इलाकों में दुग्ध नेटवर्क का प्रसार होने की प्रबल संभावना है।
कार्यक्रम के प्रमुख फायदे
पशुपालकों के लिए:
दुग्ध व्यवसाय प्रारंभ करने में वित्तीय मदद बैंकिंग ऋण पर अनुदान की सुविधा आमदनी में निरंतर इजाफा स्वरोजगार के नवीन अवसर
ग्रामीण अर्थतंत्र के लिए:
दूध उत्पादन में बढ़ोतरी स्थानीय स्तर पर आर्थिक सक्रियता में गति रोजगार निर्माण युवाओं के लिए स्वनियोजन के रास्ते
प्रशासनिक वक्तव्य और आगामी योजनाएं
राज्य प्रशासन ने आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा है कि यह पहल दुग्ध क्षेत्र को नवीन दिशा प्रदान करने के साथ साथ कृषकों की आय में वृद्धि करने में अहम योगदान देगी।
डेयरी क्रियाकलापों के प्रसार से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साधन भी बढ़ेंगे और क्षेत्रीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां सुदृढ़ होंगी।
सरकार ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि समस्त प्रक्रियाएं समयबद्ध रूप से पूर्ण हों, जिससे पशुपालकों को कार्यक्रम का अधिकतम लाभ प्राप्त हो सके।
आवेदन प्रक्रिया और पात्रता
इच्छुक कृषक अपने जिले के पशुधन विकास विभाग कार्यालय से संपर्क स्थापित कर सकते हैं। आवेदन हेतु अपेक्षित प्रलेख और योग्यता मापदंड की सूचना विभाग से हासिल की जा सकती है।
संभावित आवश्यक प्रलेख:
भू-स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज परिचय पत्र और आधार बैंकिंग खाता विवरण पशुपालन का पूर्व अनुभव (यदि उपलब्ध हो)
त्रिवर्षीय कार्ययोजना
2023-24: 50 दुग्धशाला केंद्र (10 मंडलीय मुख्यालय) 2024-25: 40 दुग्धशाला केंद्र (8 मंडलीय मुख्यालय) 2025-26: 114 दुग्धशाला केंद्र (57 जनपद)
समग्र संकल्प: तीन वर्षों में 204 दुग्धशाला इकाइयां
कार्यक्रम का आर्थिक प्रभाव
इस महत्वाकांक्षी परियोजना से:
प्रदेश में दूध उत्पादन में उछाल हजारों परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नवीन स्रोत पशुधन क्षेत्र में आधुनिकीकरण युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर
समापन विचार
नन्दिनी कृषक समृद्धि कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के दुग्ध उद्योग में परिवर्तनकारी बदलाव की पहल है। ऋण मंजूरी और अनुदान वितरण में आई तीव्रता से पशुपालकों में नवीन ऊर्जा का संचार हुआ है।
तीन बरसों में 204 दुग्धशाला केंद्रों की स्थापना का महत्वाकांक्षी लक्ष्य न सिर्फ कृषकों की आमदनी बढ़ाएगा, अपितु ग्रामीण अर्थतंत्र को भी सुदृढ़ता प्रदान करेगा। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रशासन की प्राथमिकता है और भूमि स्तर पर इसके उत्साहवर्धक परिणाम दृष्टिगोचर होने लगे हैं।
विस्तृत जानकारी के लिए अपने जिले के पशुधन विकास विभाग से संपर्क करें।
अस्वीकरण: कार्यक्रम के नियम एवं शर्तें समय-समय पर परिवर्तित हो सकती हैं। आवेदन से पूर्व सरकारी सूचना अवश्य प्राप्त करें।

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