Gold Silver ETF में बड़ा बदलाव! 1 अप्रैल 2026 से NAV कैलकुलेशन बदलेगा, निवेशकों को होगा सीधा असर

सोना और चांदी में एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) के माध्यम से निवेश करने वाले इन्वेस्टर्स के लिए महत्वपूर्ण खबर है। मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने गोल्ड और सिल्वर ETF की वैल्यू निर्धारण प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। 1 अप्रैल 2026 से इन फंड्स की वैल्युएशन घरेलू स्टॉक एक्सचेंजों पर तय होने वाली स्पॉट कीमतों के आधार पर की जाएगी। आइए जानते हैं इस नए नियम की पूरी जानकारी।

सेबी का नया वैल्यूएशन नियम क्या है?

सेबी ने 26 फरवरी 2026 को जारी अपने सर्कुलर में स्पष्ट किया है कि 1 अप्रैल 2026 से म्यूचुअल फंड स्कीम्स अपने पास रखे गए फिजिकल गोल्ड और सिल्वर का मूल्यांकन मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा जारी स्पॉट प्राइस के आधार पर करेंगी। यही स्पॉट प्राइस उन डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट में भी उपयोग होती है जहां फिजिकल डिलीवरी होती है।

अब तक गोल्ड और सिल्वर ETF में कीमती धातुओं का मूल्यांकन लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) के AM फिक्सिंग प्राइस के आधार पर किया जाता था। नए नियम के तहत यह प्रक्रिया पूरी तरह बदल जाएगी।

वर्तमान वैल्युएशन प्रक्रिया कैसे काम करती है?

फिलहाल गोल्ड और सिल्वर ETF में LBMA के अंतरराष्ट्रीय प्राइस को सीधे नहीं अपनाया जाता। इसमें मेट्रिक और करेंसी कन्वर्जन, परिवहन व्यय, कस्टम ड्यूटी, टैक्स और घरेलू बाजार के अनुसार प्रीमियम/डिस्काउंट जैसे समायोजन किए जाते हैं। यह प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली है।

सेबी क्यों बदल रहा है वैल्यूएशन सिस्टम?

सेबी का तर्क है कि स्टॉक एक्सचेंज रेगुलेटेड संस्थाएं हैं जहां पारदर्शिता और नियमों का कड़ाई से पालन होता है। एक्सचेंजों द्वारा जारी स्पॉट प्राइस का उपयोग करने से सोने और चांदी का वैल्युएशन भारतीय बाजार की वास्तविक परिस्थितियों के अधिक निकट होगा।

इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य है:

एकरूपता लाना: विभिन्न फंड हाउस द्वारा अपनाई जा रही अलग-अलग वैल्युएशन पद्धतियों में समानता आएगी।

पारदर्शिता बढ़ाना: निवेशकों के लिए ETF की कीमतों को समझना आसान होगा।

घरेलू बाजार प्रतिबिंब: ETF की वैल्यू भारतीय बाजार की सही स्थिति को बेहतर दर्शाएगी।

1 अप्रैल 2026 से क्या बदलेगा?

नया वैल्युएशन फ्रेमवर्क 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। यह बदलाव सेबी (म्यूचुअल फंड) रेगुलेशंस, 2026 के लागू होने के साथ जुड़ा है। इस तारीख से गोल्ड और सिल्वर ETF में रखे गए फिजिकल मेटल की कीमत नए नियमों के अनुसार निर्धारित होगी।

स्पॉट प्राइस निर्धारण की प्रक्रिया सेबी के स्पॉट पोलिंग गाइडलाइंस के अनुरूप होगी, जो सुनिश्चित करेगी कि पूरी प्रणाली पारदर्शी और विश्वसनीय बने।

निवेशकों पर क्या होगा प्रभाव?

इस परिवर्तन का अर्थ है कि गोल्ड और सिल्वर ETF की NAV अब घरेलू एक्सचेंज स्पॉट प्राइस पर आधारित होगी। निवेशकों को अधिक पारदर्शिता, विभिन्न स्कीम्स की आसान तुलना, कम विसंगतियां और बेहतर ट्रैकिंग का लाभ मिलेगा। हालांकि रिटर्न अभी भी मेटल्स की मार्केट कीमतों पर निर्भर रहेगा।

AMFI की जिम्मेदारी

सेबी ने स्पष्ट किया है कि नए वैल्युएशन सिस्टम को लागू करने के लिए एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) सेबी से परामर्श करके एक समान नीति तैयार करेगा। इससे सुनिश्चित होगा कि सभी फंड हाउस एक समान तरीके से इस नियम को अपनाएं और कोई भ्रम की स्थिति न रहे।

निष्कर्ष

सेबी द्वारा गोल्ड और सिल्वर ETF के वैल्युएशन में किया गया यह बदलाव भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में पारदर्शिता और एकरूपता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला यह नया नियम निवेशकों को बेहतर स्पष्टता प्रदान करेगा और घरेलू बाजार की वास्तविकता को अधिक सटीक तरीके से प्रतिबिंबित करेगा। यदि आप गोल्ड या सिल्वर ETF में निवेशित हैं, तो इस बदलाव को समझना आपके लिए आवश्यक है।

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